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रविवार, 23 नवंबर 2008

चॉदी की जूती

विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र के पाच राज्यो में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है, कांग्रेस व बीजेपी चुनावों के इस दंगल को अगले बरस संभावित लोकसभा चुनावो का सेमीफाईनल मान कर चल रही है। लाजिम है कि वे चुनावो को सेमीफाईनल माने क्योकि इन प्रमुख पूंजीवादी राजनैतिक दलो के लिये चुनाव भी एक खेल या जंग ही है। ये सिद्धांतहीन दल “जंग व इश्क में सब कुछ जायज” की रणनिती के आधार पर जंग लडते आये है जितते आये है, अब इनके पास लाठी है तो भैस भी इनकी ही होना चाहिये। आज मध्यप्रदेश में भारतीय संविधान के पुरोधा बाबा अंबेन्डकर की जन्मस्थली महू के ग्राम चोरल व आसपास के गावों में घुमते समय यकायक चीन का माझी याद गया, गोरो ने चीन के अकर्मण्य सम्राट की मदत से चीन की पुरी जनता को अफीमची बनवा दिया था। मध्यप्रदेश के पी.ड्ब्ल्यू.डी. मंत्री सिहस्थ, विधवा पैंशन … घोटाला फैम आतंकी सांध्वी प्रज्ञा के नये खैरख्वाह सी.एम. इन वेटिंग अमाननीय कैलाश विजयवर्गीय जी गोरो से कोई कम थोडे ही है उनके छर्रे गावो में सूरा की नदिया बहा रहे है। अपने पठ्ठो के लिये तो ठीक गावो के तथाकथित मुकादमों के वास्ते कार-मोटरसाईकिलो की रेवडी बाटी जा रही है, महंगाई के इस दौर में दो बोरे भर चांदी की पायजेब बटवायी जा चुकी है, इसपर भंडारो के द्वार तो सदैव खुले ही है। शिवराज के राज में भले ही कुपोषण या भुखमरी से बच्चो की मौते हुवी हो इधर मंत्री जी के क्षेत्र में धार्मिक अनुष्ठानों व भंडारों के नये रिकार्ड कायम किये गये है।
विरेन्द्र जैन साहब की गिनती मध्यप्रदेश के चंद प्रमुख स्वतंत्र पत्रकारों में की जाती है, जैन साहब जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष भी रहे है। मध्यप्रदेश से छपने वाले प्रमुख हिन्दी पाक्षिक लोकजतन में छपने वाला आपका कालम बडा प्रसिद्ध है। पूंजीवादी व पूंजीवादी-सांप्रदायिक दलो के महान नेताओ को समर्पित विरेन्द्र जैन साहब का एक गीत शाया कर रहा हूँ।

चॉदी की जूती
नंगो की बस्ती में चलती
चॉदी की जूती
पैसा जिसके पास उसी की
बोल रही तूती

लक्ष्मी जिसके पास
उसी का रंग है चमकीला
कौन देखता चकाचौंध में
काला या पीला
धूम धडाके में दब जाती
उसकी करतूती
नंगो के बस्ती में चलती
चॉदी की जूती

उसकी गाडी उसके बैनर
उसके ही झन्डे
उसके बाबा उसके मुल्ले
उसके ही पण्डे
ठाकुर साहब साथ हो लिये
कर मूछें नीची
नंगो की बस्ती में चलती
चॉदी की जूती

3 टिप्‍पणियां:

Mired Mirage ने कहा…

चाँदी की पायजेब मिली हैं तो उन्हें पहनकर वोट देने जाएं और वोट उसी को दें जो काम करे ।
कविता बढ़िया है ।
घुघूती बासूती

prakharhindutva ने कहा…

Janab,
Phir se aapke muslim bhaiyon ne mumbai mein sachche Islam ka matlab samjha diya. Ab bhi aapko Sadhvi pragya hi nazar aati hai??

Pradeep Kant ने कहा…

उसकी गाडी उसके बैनर
उसके ही झन्डे
उसके बाबा उसके मुल्ले
उसके ही पण्डे
ठाकुर साहब साथ हो लिये
कर मूछें नीची
नंगो की बस्ती में चलती
चॉदी की जूती

Bahut Badhiya Bhai

Accha Khinchai ki hai

- Pradeep Kant
- Madhu Kant