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शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

कवि , रंगकर्मी , नाटककार, अभिव्यक्ति के सम्पादक शिवराम नहीं रहे

ख्यात जनवादी नाटक 'जनता पागल हो गई है' के नाटककार, कवि और मार्क्सवादी चिंतक 'शिवराम' का 1 अक्टूबर 2010 के तीसरे पहर पौने तीन बजे कोटा में हृदयाघात से देहान्त हो गया। वे भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (यूनाइटेड) के पोलिट ब्यूरो के वर्तमान सदस्य व दूरसंचार कर्मचारियों के नेता थे।

शिवराम का जन्म 23 दिसंबर 1949 को राजस्थान के करौली नगर में हुआ था। पिता के गांव गढ़ी बांदुवा, करौली और अजमेर में शिक्षा प्राप्त की। फिर वे दूर संचार विभाग में तकनीशियन के पद पर नियुक्त हुए। दो वर्ष पूर्व ही वे सेवा निवृत्त हुए थे।

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सांगठनिक काम के महत्व को वे अच्छी तरह जानते थे। आरंभ में प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े रहे। जनवादी लेखक संघ के संस्थापकों में से वे एक थे। लेकिन जल्दी ही सैद्धान्तिक मतभेद के कारण वे अलग हुए और अखिल भारतीय जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा 'विकल्प' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वर्तमान में वे 'विकल्प' के महासचिव थे।

जनवादी लेखक संघ इन्दौर इकाई कवि नाटककार, रंगकर्मी और मजदूरों के जुझारू नेता कामरेड शिवराम को श्रद्घाजली अर्पित करता है।

कामरेड शिवराम को लाल सलाम!

1 टिप्पणी:

प्रदीप कांत ने कहा…

कामरेड शिवराम को लाल सलाम के साथ श्रद्धांजलि