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शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

पंच परमेश्वर

''फरमान सुन पैगंबर-ए-इकबाल कहते है।
ईमाम-ए-हिन्द फिर जलावतन होते है।।''

जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच की जबा से खुदा बोलता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
ये खुदा किसकी जबा बोलता है
जफ़ा तो पंचो की जबा नहीं
नाइंसाफी ही कही खुदाई तो नहीं

जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच के दिल में खुदा बसता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
किसका खुदा है जो दिल में बसा है
जानिबदार ये तेरा-मेरा दिल नहीं
ख़िदमत-ए-बेदाद खुदा हममें नहीं

जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच में परमेश्वर वास करता हैं
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
अक्ल कहती सब फरेब-ए-नजर है
दिवानो को बख्शे वो अद्ल है नहीं
पुरे कायनात में खुदा कही नहीं

3 टिप्‍पणियां:

शरद कोकास ने कहा…

बढ़िया कविता ।

प्रदीप कांत ने कहा…

सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
ये खुदा किसकी जबा बोलता है
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बताओ खुदा किसकी ज़बाँ बोलता है?

ranjansahu ने कहा…

Nice song, carry on.

bhagwan kahna hai
dil mai hai
Toh us kisan ki dil ko pucho joh aatma hatya karta hai
bhagwan kahna hai
Man mai hai
Toh us bhuka admi ki man ko pucho joh khane kai liye taras ta hai