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मंगलवार, 4 नवंबर 2008

नया पथ : जुलाई–सितंबर ’08 अंक


संपादकीय
आवाज़ जो गूंजती रहेगी
महमूद दरवेश : चंचल चौहान
महमूद दरवेश की कविता : 'मैं फि़लिस्तीन का आशिक़'
तजु‍र्मा : एजाज़ अहमद
अहमद फ़राज़ : सुरेश कुमार
अहमद फ़राज़ की तीन कविताएं
वेणुगोपाल की दो कविताएं
प्रस्तुति : सुधा सिंह

परत–दर–परत विमर्श
एस.डब्ल्यू. फ़ैलन के कोश की भूमिका
अंग्रेज़ी से अनुवाद: ऐना रुथ जे व रविकांत
फ़ैलन की भूमिका पर टिप्पणी : रविकांत
दिल्ली की ज़बान : सुहैल हाशमी
अनुवाद : कांतिमोहन ‘सोज़’
देहली कालेज: ज्ञानविज्ञान की शुरुआत : मधु प्रसाद
अनुवाद : नरेश ‘नदीम’
सदाबहार हिंदुस्तानी ज़बान : आलोक राय
अनुवाद : संजीव कुमार
हिंदी–उर्दू के बीच संवाद : कृष्णबलदेव वैद
हिंदी उर्दू के साथ साथ : अशोक वाजपेयी
ये अपनी ज़बान है : मंगलेश डबराल
उर्दू रंगमंच : जावेद मलिक
कवि सम्मेलन और मुशायरा : कांतिमोहन ‘सोज़’
फि़ल्मी गीतों की मिलीजुली ज़बान : जवरीमल्ल पारख

साझा समाज : साझा अहसास

बनारस : तीन कविताएं 1. गालिब 2. भारतेंदु 3. केदारनाथ सिंह
विधवा : तीन कविताएं 1. बेवा : हाली 2. विधवा : निराला 3. बेवा : नज़ीर बनारसी

विरासत : आज़ादी के दौर की कुछ उर्दू नज्में
ब्रिटिश शासन : अकबर इलाहाबादी
कराइन कह रहे हैं : अकबर इलाहाबादी
जावेद नामा : इक़बाल
टिप्पणी : आफ़ाक़ अहमद
सरमाया–ओ–मेहनत : इक़बाल
पयामे वफ़ा : चकबस्त
मज़ालिमे पंजाब : जफ़र अली खां
जोश की दो नज्में, अली सरदार जाफ़री, मजाज़, जगन्नाथ आज़ाद, साहिर लुधियानवी, तिलोकचंद महरूम
व फ़ैज़ की एक एक कविता

बहस के इर्द–गिर्द

हिंदी क्षेत्र की बोलियां : दिनेशकुमार शुक्ल
वे ख्वाब देखते हैं ... : बुद्धिनाथ मिश्र
19 वीं सदी में परिस्थितियां और भाषा विवाद : वैभव सिंह

नया पथ का पता : 8 ​विट्ठलभाई पटेल हाउस, नयी दिल्‍ली–110001
नया पथ : जुलाई–सितंबर ’08 अंक निम्न पते पर भी उपलब्ध है।
परेश टोकेकर कबीरा
सचिव, जनवादी लेखक संघ, इन्दौर
293, अनूप नगर
इन्दौर, म.प्र.
फोन: 0731-2551357, 9425956686
ईमेल: jlsindore@gmail.com

शुक्रवार, 11 जनवरी 2008

हिन्दी उर्दू मालवी निमाड़ी भाषाओं में युवा कहानी कविता प्रतियोगिता

जनवादी लेखक संघ, इन्दौर मालवा निमाड़ अंचल के 18 से 28 वर्ष तक के युवा साहित्यकारों के लिए हिन्दी/उर्दू/मालवी बोली/निमाड़ी बोली में युवा कहानी प्रतियोगिता तथा युवा कविता प्रतियोगिता का आयोजन कर रहा हैं। उपरोक्त भाषाओं/बोलियों में से किसी भी एक भाषा या बोली में रचनाकार अपनी रचना दिनांक 10 फरवरी 2008 तक निम्ननिखित पते पर भेज दें।

सनत कुमार
95 ए, बृजेश्वरी एनेक्स
बंगाली चौराहें के पास, इन्दौर 452016
दूरभाष :- 2307517

कार्यशाला – प्रतियोगिता में प्राप्त श्रेष्ठ रचना के लेखकों /कवियों को पुरूस्कृत किया जाएगा, उनकी रचनाओं के प्रशासन की व्यवस्था की जाएगी तथा दो दिवसीय “आशा कोटीया साहित्य कार्यशाला” में उन्हें आमंत्रित किया जाएगा।

11 जनवरी 2008
जनवादी लेखक संघ, इन्दौर

रविवार, 6 जनवरी 2008

जलेसं इन्दौर की मासिक रचना गोष्ठी एवं लघुपत्रिका का विमोचन (दिनांक: 5 दिसंबर 2007)

इन्दौर,
जलेस इन्दौर विगत अनेक वर्षो से नियमित रूप से मासिक रचना गोष्ठी का आयोजन करता रहा है, जिसके अंतर्गत शहर के, प्रदेश के तथा बाहर से आये अनेक अतिथि साहित्यकारों की रचनाओ का पाठ तथा चर्चा के कार्यक्रम सम्पन्न हुए है। इसी क्रम में उर्दू - हिन्दी साहित्यप्रेमीयो की बडी तादात में उपस्थिति के बीच 25 नवम्बर 2007 को न्यू मुस्लिम लाइब्रेरी, खजराना, इन्दौर में उर्दू एवं हिन्दी के कहानीकारो प्रो. हदीस अंसारी व सुश्री चारूशीला मौर्य का रचना पाठ एवं पठित रचनाओ पर चर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत जलेसं इन्दौर द्वारा प्रकाशित लघुपत्रिका "संवेदना" के जलेसं इन्दौर उपाध्यक्ष एवं न्यू मुस्लिम लाइब्रेरी के संचालक डॉ. अजीज इन्दौरी के हस्ते विमोचन से हुई। लघुपत्रिका का प्रथम अंक उपस्थित समस्त श्रोताओ को वितरीत किया गया।
रचनापाठ में शिरकत करते हुवे सामाजिक कार्यकर्त्ता चारूशीला मौर्य ने स्त्रीमुक्ति प्रधान कहानी "फिरकनी" का पाठ किया। चर्चा में हिस्सा लेते हुवे साहिस्यकार एवं साहित्यप्रेमियो ने रेखांकित किया कि - गत्यात्मक यर्थाथवादी दृष्टिकोण को परिलक्षित करती "फिरकनी" में मनौविज्ञान व समाज शास्त्र का अद्भुत संगम है। कहानी में "फिरकनी" के माध्यम से समाज की गतिशीलता का बखुबी वर्णन किया गया है जिसमे नायिका कंचन एक स्त्री होने के नाते बचपन में भोगे दर्द पीडा भेदभाव का प्रतिकार अपनी लडकी को उसी तरह के दर्द पीडा व भेदभाव का शिकार बनने से बचाकर करती है।
आगे उर्दू लेखक प्रो. हदीस अंसारी अपनी कहानी "गांधी चौक" के माध्यम से हिन्दूस्तानी समाज की एक अन्य समस्या मजहबी फसादो का घिनोना चेहरा बेनकाब करते है। सारगर्भित चर्चा में समीक्षको ने कहानी के केनवास, भाषा विन्यास एवं तकनीकी में किये गये नये प्रयोग की सराहना की। लेखक ने कांता चौधरी एवं अबदुल्ला बाबा नाम के फसाद पिडीत चरित्रो के खामोश आसूओ एवं स्त्री, पुरूष एवं बच्चे की अधजली लाशो के माध्यम से मजहब के नाम पर लडने वाले नासमझो को मजहब के नाम पर लडाने वालो के मंसूबो से आगाह किया है।
चर्चा में हिन्दूस्तानी साहित्य में इन्दौर के प्रमुख हस्ताक्षर श्री विलास गुप्ते व सूर्यकांत नागर के साथ डॉ. कफील अहमद, फय्याज फैज़, फरयाद बहादुर, वरिष्ठ मार्क्सवादी चिंतक देवीप्रसाद मौर्य, जलेस म.प्र. के कार्यकारी अध्यक्ष सनत कुमार, अहमद निसार, प्रदीप मिश्र, रजनी रमण शर्मा, ए जी खान, हिन्दी - मलयालम के प्रसिद्ध लघुकथाकर एन उन्नी, परेश टोकेकर इत्यादि ने भाग लिया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. अजीज इन्दौरी ने कहा कि हिन्दी - उर्दू के कवि - शायरो के ही समान हिन्दी - उर्दू के कहानीकारो का भी एक मंच पर लाया जाना एवं एक दूसरे को जानना अत्यंत आवश्यक है जिसकी हिन्दुस्तान में एक पुरानी रवायत रही है।

जनवादी लेखक संघ (Janwadi Lekhak Sangh) के उद्देश्य

  1. लेखकों के वैचारिक संघर्ष का नेतृत्व करना और उनके लिए रचनात्मक विकास की परिस्थितिया उत्पन्न करने का प्रयास करना।
  2. जनवादी लेखन के प्रकाशन, प्रचार तथा प्रचार के लिए हर संभव प्रयत्न करना तथा जातिवाद, छुआछूत , अंधविश्वास, रूढ़िवादिता, सांप्रदायकिता तथा अलगाववाद को फैलाने वाले सामंती, साम्राज्यवादी और पतनशील पूंजीवादी लेखन का विरोध करना।
  3. जनता की स्वस्थ सांस्कृतिक परंपराओ का संरक्षण और विकास करना तथा उसकी सांस्कृतिक चेतना के विकास में योग देना।
  4. लेखको के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक हितों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना।
  5. जनवादी लेखकों के लिए सम्मेलनों, संगोष्ठियों तथा अध्ययन और कार्यशिविरों का आयोजन करना।
  6. भारत तथा विदेशों की सभी भाषाओ के जनवादी लेखकों और संस्कृतकर्मियों के संगठनों के साथ संबंध विकसित करना।