जलेस की पत्रिका नया-पथ पढने के लिये क्लिक करे!
व्यंग्यजल राजनीति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
व्यंग्यजल राजनीति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

पंच परमेश्वर

''फरमान सुन पैगंबर-ए-इकबाल कहते है।
ईमाम-ए-हिन्द फिर जलावतन होते है।।''

जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच की जबा से खुदा बोलता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
ये खुदा किसकी जबा बोलता है
जफ़ा तो पंचो की जबा नहीं
नाइंसाफी ही कही खुदाई तो नहीं

जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच के दिल में खुदा बसता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
किसका खुदा है जो दिल में बसा है
जानिबदार ये तेरा-मेरा दिल नहीं
ख़िदमत-ए-बेदाद खुदा हममें नहीं

जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच में परमेश्वर वास करता हैं
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
अक्ल कहती सब फरेब-ए-नजर है
दिवानो को बख्शे वो अद्ल है नहीं
पुरे कायनात में खुदा कही नहीं

मंगलवार, 4 अगस्त 2009

वीरेन्द्र जैन की व्यंग्यजल -हमारा बहुमत है

हमारा बहुमत है

हम जो चाहे करें, हमारा बहुमत है
देश समूचा चरें, हमारा बहुमत है
वोट बटारें नैतिकता पर, फिर उसकी
मिल कर चटनी करें, हमारा बहुमत है
आलू प्याज सरीखे मत भी बिकते हैं
देकर ऊंची दरें, हमारा बहुमत है
मँहगाई से, दंगों से, हुड़दंगों से
लोग जियें या मरें, हमारा बहुमत है
पतित पावनी संख्याओं की गंगा से
सारे पापी तरें, हमारा बहुमत है
ईमानों की पोषाकें जो पहिने हैं
मारे मारे फिरें, हमारा बहुमत है
ऐसे हो या वैसे हो या जैसे हो
सब बहुमत से डरें, हमारा बहुमत है