ईमाम-ए-हिन्द फिर जलावतन होते है।।''
जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच की जबा से खुदा बोलता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
ये खुदा किसकी जबा बोलता है
जफ़ा तो पंचो की जबा नहीं
नाइंसाफी ही कही खुदाई तो नहीं
जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच के दिल में खुदा बसता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
किसका खुदा है जो दिल में बसा है
जानिबदार ये तेरा-मेरा दिल नहीं
ख़िदमत-ए-बेदाद खुदा हममें नहीं
जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच में परमेश्वर वास करता हैं
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
अक्ल कहती सब फरेब-ए-नजर है
दिवानो को बख्शे वो अद्ल है नहीं
पुरे कायनात में खुदा कही नहीं
पंच की जबा से खुदा बोलता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
ये खुदा किसकी जबा बोलता है
जफ़ा तो पंचो की जबा नहीं
नाइंसाफी ही कही खुदाई तो नहीं
जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच के दिल में खुदा बसता है
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
किसका खुदा है जो दिल में बसा है
जानिबदार ये तेरा-मेरा दिल नहीं
ख़िदमत-ए-बेदाद खुदा हममें नहीं
जुम्मन उदास अलगु से ये कहता है
पंच में परमेश्वर वास करता हैं
सुनके अलगु जुम्मन से कहता है
अक्ल कहती सब फरेब-ए-नजर है
दिवानो को बख्शे वो अद्ल है नहीं
पुरे कायनात में खुदा कही नहीं